एक ही दवा, दो नतीजे
कई बार किसान कहते हैं कि पिछली बार जो दवा चली थी, इस बार नहीं चली। अक्सर कारण दवा नहीं, छिड़काव का समय होता है।
दोपहर में क्यों नहीं
तेज़ धूप में बूँदें पत्ती तक पहुँचने से पहले ही हवा में सूख जाती हैं। जो पहुँचती हैं वे जल्दी सूख जाती हैं और पत्ती के अंदर नहीं जातीं। गर्मी में पत्ती के छिद्र भी बंद रहते हैं।
सबसे अच्छा समय
- सुबह: सूरज निकलने के बाद, ओस सूखने पर
- शाम: धूप ढलने के बाद, पर अंधेरा होने से पहले
ओस पर छिड़काव करने से दवा पानी के साथ बह जाती है। इसलिए ओस सूखने का इंतज़ार कीजिए।
हवा देखिए
तेज़ हवा में बूँदें बगल के खेत में उड़ जाती हैं। इसे ड्रिफ़्ट कहते हैं — दवा बर्बाद होती है और पड़ोसी की फसल को नुकसान भी हो सकता है। हल्की हवा ठीक है, तेज़ हवा में रुक जाइए।
बारिश का अनुमान
छिड़काव के बाद कम से कम चार घंटे बारिश नहीं होनी चाहिए। मौसम देखकर ही दिन तय कीजिए।
मात्रा और पानी की मात्रा हमेशा पैक पर लगे स्वीकृत लेबल के अनुसार ही रखिए।